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नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

केन्द्रीय बजट 2020-21 का सारांश

वित्त मंत्रालय , भारत सरकार         केन्द्रीय बजट 2020-21 का सारांश                        भाग - 1 21वीं शताब्दी के तीसरे दशक का पहला केन्द्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज दूर-दराज तक पहुंचने वाले अनेक सुधारों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य लघु अवधि, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था को ऊर्जावान बनाना है।  • केन्द्रीय बजट “जीवन को सरल बनाने” की सम्पूर्ण विषय-वस्तु पर तैयार किया गया है। किसानों के अनुकूल पहल करके इसे 2020-21 के लिए 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण लक्ष्य रखा गया है और खराब होने वाली वस्तुओं के लिए बिना किसी बाधा वाली राष्ट्रीय शीत आपूर्ति श्रृंखला के लिए भारतीय रेलवे और नागर विमानन मंत्रालय ने क्रमशः “किसान रेल” और “कृषि उड़ान” की शुरुआत की है; 20 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े पम्पों को हासिल करने के लिए पीएम कुसुम का विस्तार किया जाएगा। • स्वास्थ्य के क्षेत्र में...

नए भारत का सपना :)

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         "      सपने वो नहीं होते जो आप                    सोने के बाद देखते हैं         सपने वो होते हैं  जो आपको सोने नहीं देते   " यह कथन हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम ने किसी व्यक्ति या उस समूह के लिए कहा है जो या तो स्वयं के लिए कुछ सपना बुनता है या पूरे टीम के लिए वर्तमान परिवेश में भारत को ' नए भारत ' में बदलने के लिए 'टीम इंडिया ' के पूरे सदस्य को  इस कथन को अपने दिलों में सजोना होगा और नए भारत को गढ़ने के लिए प्रतिबद्धता के साथ सब को आगे आना होगा ।        इससे पहले कि हम वर्तमान भारत के नए विज्ञान और सपनों को देखें। उससे पहले हमें अपने प्राचीन इतिहास को देखना होगा। जब भारत एक समृद्ध राष्ट्र था इसका विस्तार काफी संपूर्ण क्षेत्र में था । यहां शिक्षा के लिए उच्च गुणवत्ता वाला विश्वविद्यालय था जैसे- नालंदा विश्वविद्यालय, तक्षशिला विश्वविद्यालय इत्यादि उसी प्रकार हमारे यहां चिकि...

मेरा हक, मेरा अधिकार :)

  " कौन सहेगा समय वक्त की मार सितमगर के सितम अब तो है बस न्याय की दरकार "                  - हैमलेट  शेक्सपियर नाटक के पात्र हैमलेट का यह कथन  वर्तमान न्याय की व्यवस्था पर सटीक बैठती है। इस आलेख की शुरुआत हम एक लघु कहानी से  करेंगे जो पुर्ण रूप से बनावटी हैं लेकिन यह कहानी आज के व्यवस्था को उजागर करती है।               यह कहानी एक ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़की मालती की (काल्पनिक नाम )  है जो बचपन से नटखट थी उसे वक्त के साथ बदलने और समय के साथ चलने का हुनर बखूबी आता था वह पुराने जमाने की बंधन को तोड़ नये तरीका से जिंदगी जीना चाहती थी अपने घर पर वो अपने सपनो को परवान भी दे रही थी लेकिन उसकी जिंदगी मे एक नया मोड़ उस समय आया जब उसके माता - पिता उसकी शादी के सिलसिले में उससे बात करने आये पहले तो वो मना कर दी क्योंकि उसके सपने बड़े थे वो अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी करना चाहती थी लेकिन अंततः मान गई जब लड़केवाले नौकरी करने पर  राजी हो गये। लड़केवाले भी उसके पिताजी के काफी समझाने क...

नम्बरों की चर्चा : बोर्ड परीक्षा

अभी हाल में हर राज्य के दसवीं और बारहवीं का परीक्षाफल प्रकाशित हुआ है लिहाजा  नम्बरों की चर्चा जोरों पर है कुछ छात्र टाॅप किए तो कुछ छात्र विफल हुए है तो वही कुछ छात्र अपने मन मुताबिक नम्बर नहीं ला सके। सफल छात्रों को शुभकामनाएं है कि अपने  सपनों को पूरा किए और असफल छात्रों को  मेरी यही सलाह रहेगी की जिंदगी में हार न माने फिर से कोशिश करें और आगे बढ़े। कुछ छात्रों को कम नम्बर आया होगा लिहाजा निराश होगें जो स्वभाविक है उनकों मेरी यही सलाह होगी की कुछ नम्बर के कम नंबर आने से आपकी जिंदगी में रूकावट नहीं आ गयी। कम न. आना ज्यादा न. आना यह तो छात्र जीवन मे लगा रहता है।        अपनी काबिलियत को नम्बर से न आके अपने बीते परिणाम से सीख ले और अपने अगले लक्ष्य का सामना करने के लिए नये ऊर्जा के साथ तैयार होकर एक नई शुरुआत करें। नम्बर कम आने से  शायद कुछ वैकल्पिक दरवाजे बंद हो जाते हैं फिर हमें नये अवसर और रास्ते तलाशने होते हैं लेकिन बाद में यही रास्ता मंजिल तक पहुँचती हैं।        

हकीकत

हाल में ही पढ़ाई से समय  निकाल कर यूँ ही मैं घूमने निकला मुझे रास्ते में कुछ कॉलोनीयों से होकर गुजरना पड़ा। कॉलनीयों को देखकर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दिल्ली जैसे शहर मे कॉलोनीयों की हालत ऐसी हैं। मैं सोच रहा था कि इसका यह कारण हो सकता हैं कि यह अनाधिकृत काॅलनियाॅ होगी लेकिन सारी काॅलनीयाॅ अनाधिकृत होगी यह संभव नहीं है।        "     हम पढ़े लिखे लोग इस काॅलनीयों को झुग्गियों का स्टेटस दे तो देते हैं लेकिन कभी गौर से इन झुग्गियों को देखते तक नहीं। यहाँ से होकर गुजरने पड़ हम अपनी नाक बंद कर लेते है हो भी क्यों ना हमें आदत जो नहीं लेकिन वहाँ रहने वाले व्यक्तियों को भी वहाँ रहने की आदत नहीं होती वे भी रहने के आदी हो जाते हैं भला क्यों न बेरोजगारी जो खिच कर  शहरों की ओर ले आती हैं।   " हाल में ही लोकसभा का चुनाव होना है। जिसके कारण उमीदवार अपने - अपने  क्षेत्र का चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं लेकिन किसी भी उम्मीदवार को उनकी स्थितियों के तरफ ध्यान नही जाता केवल घोषणा पत्र बन कर रह जाता हैं। शायद हमें लगता हैं कि यहाँ के ...

किसानों के दहलीज पर सूखे की समस्या

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हाल ही में भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को पर्याप्त अाॅकड़े सौपें है कि किसानों के दहलीज पर सूखे की समस्या आने वाली है। इस बात से कहीं न कहीं केन्द्र सरकार और हर राज्य की सरकारे अवगत है लेकिन किसी को भी सूखे की चिंता नहीं है । हर कोई अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति में लगा हुआ है। भला किसानों को इस बात से कौन अवगत कराये की उनके दरवाजे पर सूखे की समस्या दस्तक दे रही हैं। हमारा देश विश्व की वृष्टि का 4%  भाग प्राप्त करता है। फिर भी भारत में जलापूर्ति व जल की कमी एक समस्या है। एक ओर इजरायल जैसे 25  सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है,  दूसरी ओर 114 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश मे प्रतिवर्ष किसी न किसी भाग में सूखा अवश्य पड़ता है। भारत में सूखे की समस्या से हर वर्ष किसान और आम जन-जीवन प्रभावित होता है। शहरों में पीने के लिए पानी की किल्लत हो जाती है। हम इस समस्या से निदान के लिए पानी के टैंकरों का प्रयोग या रेल पानी टैंकर का प्रयोग कर इसकी पूर्ति करते हैं लेकिन हमे कृषि के लिए पर्याप्त मात्र...

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भारत में अधिकतर कृषकों के लिए कृषि जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं । क्यों ?

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं जाहिर सी बात हैँ कि यहाँ की अधिक अबादी कृषि पर निर्भर हैं और आजादी से पहले भी थी । यह अबादी आज भी और आजादी से पहले भी अपना जीवन - निर्वाह कृषि से करती थी लेकिन यह अधिकतर कृषकों के लिए जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं ।                आजादी से पहले भारतीय किसानों को अंग्रेजों के द्वारा करीब 150 साल किसी न किसी फसल के लिए मजबूर किया गया । जैसे - नील की खेती , पटसन , चाय , कपास इत्यादि               इसका खामियाजा भारतीय किसानों को भुगतना पड़ा उनकी जमीन बंजर हो गई और   और दूसरी फसल नहीं होती थी जिसके कारण इनका जीवन - निर्वाह दुर्लभ हो गया और देश के कई भागों में अकाल पड़ गया । जिसमें बंगाल मुख्य था । ऊपर से अंग्रेजों के द्वारा भारतीय किसानों के फसलों पर लगाया गया लगान ( कर ) वसुली से तंग आकर कृषि से मुँह मोड़ लिए क्योंकि अब जीवन - निर्वाह करना मुश्किल हो गया और अंततः पलायन कर गये ।            15 अगस्त 1947 को देश ...

अलविदा 2017 और स्वागत 2018

2017 को भुल नहीं पायेंगे क्योंकि यह साल दुःख और खुशी दोनों से भरा था लेकिन खुशी ज्यादा और दुख कम फिर भी जिंदगी में दुख नहीं हो तो खुशी का मजा कहाँ । सुख और दुख यह जिंदगी के दो पहलू हैं । यह हमें जिंदगी जिना सिखाता हैं और हमें जितना सिखाता हैं ।              यह साल हमें एक नया आयाम और नई सोच दे गया । इसके लिए मैं इसका अभारी हूँ । यह हमें आनेवाले 2018 के लिए एक नई जोश और उमंग देकर जा रहा हैं ।           यह साल हमारे लिए खास इसलिए रहा की इस साल सितम्बर माह में हमने अपने ब्लॉग की शुरूआत की जो आप सभी के बीच हैं ।    हमने तीन - चार कहानियाँ लिखी जिसमें से एक कहानी ' डिजिटल गर्लफेंड ' प्रतिलिपि में प्रकाशित हुई जो खास लोकप्रिय रही क्योंकि एक माह में 4000 + से भी ज्यादा पाठकों द्वारा पढ़ा गया और टाँप टेन कहानियों में सेलेक्ट हुई । आप यदि इस कहानी को पढ़ना चाहते हैं तो हमारे ब्लॉग , प्रतिलिपि या Google में खोज सकते है ।             यह साल आनेवाले 2018 साल के स्वागत के लिए हमें जोश और...

बच्चों का भविष्य बेहतर , देश बेहतर :) बच्चों की आवाज बाल दिवस पर

आज भी हमारा देश भूखमरी में 100 वाँ स्थान पर हैं । हम तरक्की की सीढी तो चढ़ रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं बच्चे को खो रहे हैं जो हमारे देश के नींव हैं । हाल ही में एक बच्चे की मृत्यु राष्ट्रीय खबर बनी फिर भी सरकार सबक नहीं लेती । उनको एक उचित शिक्षा , भोजन , वस्त्र या आवास उपलब्ध नहीं करा पाती तो समझिए हमारी तरक्की बेकार हैं , हम आग आगेे तो बढ़ रहे हैं लेकिन पीछे - पीछे देश का आनेवाला भविष्य नष्ट कर रहे हैं । ये पंक्तियाँ व्याख्यान कर रही हैं । शहर से दूर  अभाव में रह रहे बच्चे के व्यथा की । " कई दिनों से चूल्हे बंद पड़े हैं भूख लगीं हैं जोड़ से आधार कार्ड लिंक नहीं हुए हैं डिलर के दुकान में कई दिनों से चूल्हे बंद पड़े हैं भूख लगीं हैं जोड़ से भात - भात कह ( कहकर ) माँ के आँचल में छुप जाता माँ की लोरी सून - सून ( सुनकर ) एक दो शाम गुजार लेता कई दिनों से चूल्हे बंद पड़े हैं भूख लगीं हैं जोड़ से भूखे पेट को झूठी अभिलाषा दिलाता दाने - दाने के लिए , डीलर के दरवाजे का चक्कर लगाता मीड - डे मील के भरोसे जी लेता एक दो शाम माँ की लोरी सून गुजार लेता शिक्षा से वंचित हैं म...

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Meaning Of Love .

" सारे अरमान अभी बाकी हैं   वर्षों के हम दोनों के ख्वाब अभी बाकी हैं         इतनी जल्दी क्यों हो , प्यार में अभी तो प्यार करने की पूरी उम्र हमारी बाकी हैं .." ( अमलेश ) " Love is not game and It is not race "    It is based on fillings , humanit...

बदलता गाँव , हक मांगता गाँव : युवा सोच

युवा सोच और नई तकनीक के बदौलत आज गांव भी तरक्की का एक नया आयाम लिख रहा हैं । गांव की तस्वीर भी बदल रही हैं आज शिक्षा के लिए भी गांव के युवाओं में एक नया जोश हैं उनकी सोच को काबिले तारीफ करनी होगी की अपने सपने आज खुद बुन रहे हैं और इसे पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत कर रहे हैं ।                 जहाँ गांव कई अभावों से ग्रसित था और आज भी  गाँवों मे कई समस्या हैं फिर भी युवाओं में एक जोश हैं कुछ कर गुजरने का और समस्या से लड़कर आगे बढ़ने की ताकत हैं । शायद कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ गांव के युवा अपनी दस्तक नहीं दिए है। सारे अभावो को पार कर एक नया आयाम लिख रहे हैं ।                   सरकार की बात करें तो सरकार तमाम दावें करती हैं लेकिन हकीकत कुछ और होता हैं । चुनावी वादों और जूमलों की तो गांव के युवाओं पर ऐसे होते हैं जैसे मानो आज कुबेर देवता धन की बारिश कर रहे हैं सब सपने जैसा दिखता हैं । हर राजनीतिक पार्टियां अपने तरफ...

गाँव का बचपन

गाँव के बचपन की बात करें तो हमें अपना बचपन याद आ जाता है और हमारे मुख पर हमारी पंक्तियाँ आ जाती है -             " आज भी जब छुट्टियों मे गॉव वापस लौटकर जाता हूँ गॉवों की वादीयॉ , उसकी धड़कने मेरी बचपन की यादें सजों कर मुझे पुकारती .... कितना शर्रारत भरा तुम्हारा वो बचपन था मेरी प्राकृतिक वादियों मे हंसता ,खेलता तुम्हारा वो बचपन था मेरे खेतों के मेड़ो से गुजरता तुम्हारा वो बचपन था क्यों शहरों मे जाकर सिमट गया तुम्हारा वो बचपन आज तुम्हें याद नहीं आती वो बचपन बचपन भी कितनी प्यारी थी हरे - भरे गॉवो की प्राकृतिक से यारी थी ये जवानी भी कितनी गॉवारी हैं प्रदूषित शहरों से यारी हैं ..."                         हम कितने मौज - मस्ती करते थे कभी खेतों में घूमते , कभी बागों में , कभी तालाबों में स्नान करते , कभी नदियों के सैर करने निकल पड़ते ।        बरसात के दिनों में हम अपन...

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किसानों के बिना न्यू इंडिया का सपना अधूरा है ।