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जनवरी 14, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

भारत में अधिकतर कृषकों के लिए कृषि जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं । क्यों ?

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं जाहिर सी बात हैँ कि यहाँ की अधिक अबादी कृषि पर निर्भर हैं और आजादी से पहले भी थी । यह अबादी आज भी और आजादी से पहले भी अपना जीवन - निर्वाह कृषि से करती थी लेकिन यह अधिकतर कृषकों के लिए जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं ।                आजादी से पहले भारतीय किसानों को अंग्रेजों के द्वारा करीब 150 साल किसी न किसी फसल के लिए मजबूर किया गया । जैसे - नील की खेती , पटसन , चाय , कपास इत्यादि               इसका खामियाजा भारतीय किसानों को भुगतना पड़ा उनकी जमीन बंजर हो गई और   और दूसरी फसल नहीं होती थी जिसके कारण इनका जीवन - निर्वाह दुर्लभ हो गया और देश के कई भागों में अकाल पड़ गया । जिसमें बंगाल मुख्य था । ऊपर से अंग्रेजों के द्वारा भारतीय किसानों के फसलों पर लगाया गया लगान ( कर ) वसुली से तंग आकर कृषि से मुँह मोड़ लिए क्योंकि अब जीवन - निर्वाह करना मुश्किल हो गया और अंततः पलायन कर गये ।            15 अगस्त 1947 को देश ...

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किसानों के बिना न्यू इंडिया का सपना अधूरा है ।