संदेश

मार्च 18, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पत्रकारिता: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आजकल विफल क्यों है?

     पत्रकारिता सिर्फ़ समाचार देने का माध्यम नहीं है । बल्कि विचारों और सत्य की आवाज़ है। यह समाज का आईना है, जो शासन की नीतियों, जनता की समस्याओं और सच्चाई के बीच पुल का काम करती है। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बाद इसी का स्थान आता है। इसी कारण पत्रकारिता को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा गया है। पत्रकारिता का इतिहास भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 1780 में ‘हिक्कीज़ बंगाल गजट’ से हुई। यह वह दौर था जब ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को उजागर करने वाला हर लेख एक क्रांति बन जाता था। धीरे-धीरे हिंदी, उर्दू और अन्य भाषाओं में भी अख़बारों की शुरुआत हुई — जिन्होंने जनता को जागरूक किया और स्वतंत्रता संग्राम की नींव मजबूत की। इसी कारण अंग्रेजी सरकार इसे दबाने के लिए कठोर नियम बनाये लेकिन पत्रकारिता जिंदा रही आज के दौर में इसके कई रुप हो गयें है। भारत की आज़ादी में पत्रकारिता और प्रेस का योगदान भारतीय प्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक क्रांति की लहर पैदा की है। बाल गंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ और ‘मराठा’ से “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दि...

किसानों के दहलीज पर सूखे की समस्या

चित्र
हाल ही में भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को पर्याप्त अाॅकड़े सौपें है कि किसानों के दहलीज पर सूखे की समस्या आने वाली है। इस बात से कहीं न कहीं केन्द्र सरकार और हर राज्य की सरकारे अवगत है लेकिन किसी को भी सूखे की चिंता नहीं है । हर कोई अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति में लगा हुआ है। भला किसानों को इस बात से कौन अवगत कराये की उनके दरवाजे पर सूखे की समस्या दस्तक दे रही हैं। हमारा देश विश्व की वृष्टि का 4%  भाग प्राप्त करता है। फिर भी भारत में जलापूर्ति व जल की कमी एक समस्या है। एक ओर इजरायल जैसे 25  सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है,  दूसरी ओर 114 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश मे प्रतिवर्ष किसी न किसी भाग में सूखा अवश्य पड़ता है। भारत में सूखे की समस्या से हर वर्ष किसान और आम जन-जीवन प्रभावित होता है। शहरों में पीने के लिए पानी की किल्लत हो जाती है। हम इस समस्या से निदान के लिए पानी के टैंकरों का प्रयोग या रेल पानी टैंकर का प्रयोग कर इसकी पूर्ति करते हैं लेकिन हमे कृषि के लिए पर्याप्त मात्र...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारत में अधिकतर कृषकों के लिए कृषि जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं । क्यों ?

डिजिटल गर्ल फ्रेंड( Digital Girlfriend )

शिक्षा का राजनीतिकरण (Politicization Of Education)

किसानों के बिना न्यू इंडिया का सपना अधूरा है ।