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नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

बिहार की राजनीति

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  🗳️ बिहार की राजनीति: आज़ादी से आज तक का सफर (गहरा विश्लेषण) बिहार की राजनीति का पूरा इतिहास — कांग्रेस के दौर से लेकर जेपी आन्दोलन, मंडल राजनीति, लालू-राबड़ी युग, नितीश कुमार के ‘सुशासन’ और आज की नई राजनीतिक धाराओं तक। एक गहरा विश्लेषण जो बताता है कि कैसे जाति, विकास और सामाजिक न्याय ने बिहार को आकार दिया। 🌾 प्रस्तावना: बिहार और राजनीति – एक गहरी कहानी अगर आप भारत की राजनीति की आत्मा को समझना चाहते हैं, तो बिहार को समझना जरूरी है। यहाँ हर चुनाव सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज की गहरी परतों का आईना होता है। देश की दिशा बदलने वाले कई बड़े आन्दोलन और नेता इसी धरती ने दिए हैं। बिहार की राजनीति को समझना मुश्किल है, क्योंकि यहाँ जाति हमेशा से राजनीतिक समीकरणों की केंद्रीय धुरी रही है। अगर आप बिहार की राजनीति को शुरू से अब तक गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। 🏛️ चरण 1: आज़ादी के बाद – कांग्रेस का दौर (1947–1960   ) आज़ादी के बाद, देश की तरह बिहार में भी कांग्रेस का दबदबा था। इस दौर के सबसे बड़े नेता थे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (बिहार केसरी) — बिहार के पह...

कवि क्या दुनिया का विधि निर्माता हैं ?

  19 वी सदी के रोमांटिक दौर के अंग्रेजी कवि सेली अपने निबंध ' दि डिफेंस अाॅफ दी पोयटरी ' में कहते हैं कि " कवि संसार के विधि निर्माता  हैं परंतु उन्हें उस विधि निर्माता की पहचान नहीं है " अर्थात अननाॅलेजड हैं।   अब हमें ये समझना होगा कि कवि होने के क्या गुण होना चाहिए ? अंग्रेजी साहित्य में कवि होने के चार प्रकार हैं। पहला यह हैं कि उस व्यक्ति में कल्पना हो तो वही दूसरा भावना हो , तीसरा तर्क शक्ति हो तथा चौथा अंत:ज्ञान (इनटीयूसन ) हो । यदि ये चार गुण जिस व्यक्ति में होगा वो कवि बन सकता हैं। हर दौर के कवि इन गुणों को अलग - अलग महत्व देते हैं।      भारतीय साहित्य के कवि भावना को ज्यादा महत्व देते हैं। महर्षि वाल्मिकी एक दिन  तमसा नदी पर स्नान करने के लिए जा रहे थे तभी उनकी दृष्टि वहां प्रेम निमग्न क्रौंच पक्षियों के एक जोड़े पर पड़ी। तभी एक व्याध्र ने अपने बाण से नर क्रौंच को मार दिया और साथी की मृत्यु से आहत मादा क्रौंच ने भी करुण-क्रंदन करते हुए कुछ ही पल में अपने प्राण त्याग दिये। यह करुण दृश्य देख  कर महर्षि वाल्मीकि का हृदय द्रवित हो उठा औ...

राजनीति का बदलता परिदृश्य ( भाग - 2 )

  प्रथम भाग का लिंक   गांधी जी  इस सत्याग्रह तक ही नहीं ठहरे इसके बाद वो अहमदाबाद मिल हड़ताल के समर्थन के लिए अहमदाबाद पहुंचे वहाँ मिल मजदूरों के समर्थन में खड़ा रहे।              जबकि आज कई सारी कंपनियों में सस्ते श्रमिक के नाम पर सुबह से शाम तक बहुत कम वेतन मे खटाया  जाता है ना रहने की व्यवस्था ना खाने की सही व्यवस्था, खाने के नाम पर एक समय खानापूर्ति की जाती हैं। ये श्रमिक देश के विकास मे योगदान देते हैं फिर इनके साथ हो रहा अन्याय किसी को नहीं दिखता हैं आखिर क्यों?      राजनीतिक इच्छा शक्ति रहती तो कोई ना कोई राजनेता इनके लिए जरूर आता। सिर्फ चुनाव के समय आकर इनकी बातों को सुनना राजनीतिक स्वार्थ की ही बात हैं।  गांधी जी का अगला पड़ाव खेड़ा सत्याग्रह हैं। जहाँ किसानों से अधिक लगान वसूलने का मामला सामने आया है। गांधी जी सरदार पटेल के साथ मिलकर खेड़ा के किसानों से लगान ना देने का अनुरोध किया । अंततः कमिटी बनी तथा उसने लगान के दरो का निर्धारण किया तथा बढ़ा हुआ दर वापस ले लिया।        गांधी जी के...

राजनीति का बदलता परिदृश्य ( भाग - 1)

राजनीति शब्द सूनते ही आम लोगों के जेहन में कई नेताओं की छवि आती हैं। तो वही पढ़े लिखे लोग इसे राज और नीति दो शब्दों से जोड़ कर देखते हैं अर्थात् वैसी नीति जिसके माध्यम से राज्य के शासन को संचालित किया जाता हैं ।         अब हमें आज की राजनीति पर चर्चा को आगे बढ़ाते समय  अपने देश के पूराने दौर के राजनीति  से तार्किक रूप से तुलना करते हुये आगे बढ़ेगें । हम शुरुआत अपने राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी के भारत वापसी से शुरू करेंगे।         वर्ष 1915 में हमारे देश की आम जनता अंग्रेज़ी हुकूमत में कैद थी। उसी दौर में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से वापस लौट कर भारत आये थें। यहाँ उन्होंने देश के विभिन्न भागों का दौरा किये और लोगों की समस्याओं को जाना। फिर लखनऊ में कांग्रेस के अधिवेशन में उनकी मुलाकात राजकुमार शुक्ल जी से हुई जिन्होंने गांधी जी को चम्पारण के किसानों के दयनीय स्थिति से अवगत कराये तथा बापू को चम्पारण आने का आग्रह किया और गांधी जी ने इसे स्वीकार किया  ।         यहाँ हमें ये समझना होगा कि गांधी जी को को...

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