संदेश

जून 22, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पत्रकारिता: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आजकल विफल क्यों है?

     पत्रकारिता सिर्फ़ समाचार देने का माध्यम नहीं है । बल्कि विचारों और सत्य की आवाज़ है। यह समाज का आईना है, जो शासन की नीतियों, जनता की समस्याओं और सच्चाई के बीच पुल का काम करती है। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बाद इसी का स्थान आता है। इसी कारण पत्रकारिता को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा गया है। पत्रकारिता का इतिहास भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 1780 में ‘हिक्कीज़ बंगाल गजट’ से हुई। यह वह दौर था जब ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को उजागर करने वाला हर लेख एक क्रांति बन जाता था। धीरे-धीरे हिंदी, उर्दू और अन्य भाषाओं में भी अख़बारों की शुरुआत हुई — जिन्होंने जनता को जागरूक किया और स्वतंत्रता संग्राम की नींव मजबूत की। इसी कारण अंग्रेजी सरकार इसे दबाने के लिए कठोर नियम बनाये लेकिन पत्रकारिता जिंदा रही आज के दौर में इसके कई रुप हो गयें है। भारत की आज़ादी में पत्रकारिता और प्रेस का योगदान भारतीय प्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक क्रांति की लहर पैदा की है। बाल गंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ और ‘मराठा’ से “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दि...

The Story Of Metro City

चित्र
     सारांश :-     यह कहानी हैं दो दोस्त रवी मोहन और सोहन के संघर्ष  की जो गाँव से मेट्रो -सीटी की ओर रोजगार के लिए  पलायन कर जातें उनका साथ उनकी पत्नी सुनैना और सुलेखा देती हैं।         यहाँ आने के बाद दोनों दोस्त काफी तरक्की करते  हैं। एक दोस्त रोजगार कर खुद की कंपनी खड़ा कर लेता  है। वही दूसरा दोस्त एक मलटी नेशनल कंपनी में प्रबंधन के उच्च पद पर कार्यरत हैं।  आज दोनों दोस्त अपने माता - पिता के साथ रहते हैं।  वही रवी मोहन की बेटी मानसी दिल्ली विश्वविद्यालय से  स्नातक करने के बाद अमेरिका में एमबीए की पढ़ाई  पूरी करती है। तो वही सोहन का बेटा सौर्य कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय से लाॅ की पढ़ाई पूरा कर रहा है।   मानसी वापस भारत आकर अपने पिता के साथ मिलकर एक नये बिजनेस प्रोजेक्ट पर कार्य करतीं हैं। इसको  कुमार रणवीर से प्यार हो जाता है जो उस समय एक मामूली सा लेखक रहता है।  उधर सौर्य कुमार को अपने काॅलेज की टाॅपर मेघा सिंह  से प्यार हो जाता है। उसके पिताजी सूर्यपूर के ...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारत में अधिकतर कृषकों के लिए कृषि जीवन - निर्वाह का एक सक्षम स्त्रोत नहीं रही हैं । क्यों ?

डिजिटल गर्ल फ्रेंड( Digital Girlfriend )

शिक्षा का राजनीतिकरण (Politicization Of Education)

किसानों के बिना न्यू इंडिया का सपना अधूरा है ।