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पत्रकारिता: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आजकल विफल क्यों है?

     पत्रकारिता सिर्फ़ समाचार देने का माध्यम नहीं है । बल्कि विचारों और सत्य की आवाज़ है। यह समाज का आईना है, जो शासन की नीतियों, जनता की समस्याओं और सच्चाई के बीच पुल का काम करती है। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बाद इसी का स्थान आता है। इसी कारण पत्रकारिता को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा गया है। पत्रकारिता का इतिहास भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 1780 में ‘हिक्कीज़ बंगाल गजट’ से हुई। यह वह दौर था जब ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को उजागर करने वाला हर लेख एक क्रांति बन जाता था। धीरे-धीरे हिंदी, उर्दू और अन्य भाषाओं में भी अख़बारों की शुरुआत हुई — जिन्होंने जनता को जागरूक किया और स्वतंत्रता संग्राम की नींव मजबूत की। इसी कारण अंग्रेजी सरकार इसे दबाने के लिए कठोर नियम बनाये लेकिन पत्रकारिता जिंदा रही आज के दौर में इसके कई रुप हो गयें है। भारत की आज़ादी में पत्रकारिता और प्रेस का योगदान भारतीय प्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक क्रांति की लहर पैदा की है। बाल गंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ और ‘मराठा’ से “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दि...

दिल्ली को बदला जा सकता है कैसे?

       अब दिल्ली को जरूरत है एक बेहतर मास्टर प्लान 2035 की   एक नया भविष्य, नई दिल्ली “2035 की दिल्ली — स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक और अवसरों से भरी राजधानी हो ।”          भारत की राजधानी दिल्ली सदियों से परिवर्तन और प्रगति की प्रतीक रही है।अब “ दिल्ली मास्टर प्लान 2035” का लक्ष्य हो — दिल्ली को ऐसा शहर बनाना जहाँ हर नागरिक को स्वच्छ हवा, सस्ती आवास, स्मार्ट ट्रैफिक, हरित ऊर्जा और डिजिटल सुविधा मिले। यह योजना दिल्ली को बीजिंग, न्यूयॉर्क और टोक्यो जैसे शहरों की श्रेणी में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। जहाँ दिल्ली देश कि सांस्कृति के साथ भारत की राजधानी की छाप छोड़ सके जहाँ सभी राज्यों की झलक देखने को मिले।       चलिए अब जानते हैं दिल्ली को इस मास्टर प्लान के तहत बेहतर कैसे बनायेंगे।  ( क )स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त दिल्ली        दिल्ली की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से प्रदूषण रही है। 2035 के मास्टर प्लान में इसका समाधान कई स्तरों पर किया गया है। जैसे -          सोलर और ...

दिल्ली में प्रदूषण के कारण और समाधान

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 दिल्ली, जो भारत की राजधानी है, आज दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बन चुकी है। सर्दियों के मौसम में जब हवा ठंडी होती है, तो दिल्ली पर स्मॉग की मोटी चादर छा जाती है। लोग सांस लेने में परेशानी महसूस करते हैं, आंखों में जलन होती है और हवा की गुणवत्ता “खतरनाक” स्तर तक पहुंच जाती है।अब दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण । यहाँ लोग सड़कों पर आ गयें है ताकि दिल्ली को बचाया जा सके। वो सरकार से मांग कर रहे हैं ताकि स्वच्छ हवा और पानी मिल सके।        चलिए जानते हैं क्या कारण है कि दिल्ली कि हवा इतनी प्रदूषित हो गयी। " स्वच्छ हवा हमारा अधिकार है, और इसे बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी।”  दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण 1. वाहनों का धुआं दिल्ली की सड़कों पर लाखों वाहन रोज़ चलते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और PM2.5 जैसे खतरनाक कण बढ़ाता है। 2. पराली जलाना हर साल फसल कटाई के बाद पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसान खेतों में पराली जलाते हैं। यह धुआं दिल्ली की हवा में मिलकर स्मॉग बनाता है। 3. निर्माण कार्य और धूल सड़क निर्मा...

बिहार की राजनीति

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  🗳️ बिहार की राजनीति: आज़ादी से आज तक का सफर (गहरा विश्लेषण) बिहार की राजनीति का पूरा इतिहास — कांग्रेस के दौर से लेकर जेपी आन्दोलन, मंडल राजनीति, लालू-राबड़ी युग, नितीश कुमार के ‘सुशासन’ और आज की नई राजनीतिक धाराओं तक। एक गहरा विश्लेषण जो बताता है कि कैसे जाति, विकास और सामाजिक न्याय ने बिहार को आकार दिया। 🌾 प्रस्तावना: बिहार और राजनीति – एक गहरी कहानी अगर आप भारत की राजनीति की आत्मा को समझना चाहते हैं, तो बिहार को समझना जरूरी है। यहाँ हर चुनाव सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज की गहरी परतों का आईना होता है। देश की दिशा बदलने वाले कई बड़े आन्दोलन और नेता इसी धरती ने दिए हैं। बिहार की राजनीति को समझना मुश्किल है, क्योंकि यहाँ जाति हमेशा से राजनीतिक समीकरणों की केंद्रीय धुरी रही है। अगर आप बिहार की राजनीति को शुरू से अब तक गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। 🏛️ चरण 1: आज़ादी के बाद – कांग्रेस का दौर (1947–1960   ) आज़ादी के बाद, देश की तरह बिहार में भी कांग्रेस का दबदबा था। इस दौर के सबसे बड़े नेता थे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (बिहार केसरी) — बिहार के पह...

राजस्थान SI भर्ती परीक्षा रद्द: क्यों होती है सरकारी परीक्षाओं में धांधली?

हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को धांधली और पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द कर दिया। यह फैसला लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी की थी। तो वही कुछ छात्रों को इसका फ़ायदा भी होगा की परीक्षा दोबारा पारदर्शी तरीके से कराया जायेगा।          पैरवी और लोकसेवा आयोग में साठगांठ से बने छात्रों को बाहर करना बहुत जरूरी था क्योंकि इसके कारण ईमानदार और मेहनती छात्र जो पढ़ के अच्छे नंबर लाए थे। कही न कही वो छात्र मेरिट लिस्ट से बाहर हो गयें थे।  यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। पिछले कुछ सालों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। चाहे वो टीचर भर्ती परीक्षा हो, पुलिस भर्ती हो या SSC और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ—हर जगह से धांधली की खबरें आती रहती हैं। अब सवाल यह है कि परीक्षाओं में बार-बार धांधली क्यों होती है? इसका असर सबसे ज्यादा किस पर पड़ता है? और इसे रोकने के लिए समाधान क्या हो सकते ह...

गुनाहों का देवता : धर्मवीर भारती

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                    गुनाहों का देवता             [ धर्मवीर भारती का अमर प्रेम उपन्यास ]             गुनाहों का देवता हिंदी साहित्य का एक ऐसा उपन्यास है, जिसने दशकों तक पाठकों के दिलों को छुआ है। यह उपन्यास पाठकों को अपने प्रेम का ऐहसास करा देता है। आज भी यह उपन्यास सच्चे प्रेम करने वालों के जिंदगी की कहानी को उजागर कर देता है। इतना ही नहीं ।          धर्मवीर भारती द्वारा रचित यह कृति केवल प्रेम कथा ही नहीं, बल्कि त्याग, समाज की परंपराओं और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं की गहन व्याख्या भी है।   • उपन्यास के मुख्य पात्र - चंदर – संवेदनशील, विद्वान और प्रेम में त्याग करने वाला युवक जो सच्चे प्रेम का मायने ढूढता है।  सुधा – चंचल, मासूम लेकिन परंपराओं से बंधी हुई युवती जो प्रेम में आत्मीय रुप से सदा चंदर की रहती है।  डॉ. शुक्ल – सुधा के पिता और चंदर के गुरु जो राजनीतिक पार्टी से भी जूड़े रहते हैं।  गेशु और बिनती – चंदर के जीवन में अस्थ...

ऋषिकेश यात्रा गाइड:

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  हरिद्वार से एक घंटे में पहुँचें आध्यात्मिक शांति और एडवेंचर की भूमि ऋषिकेश, उत्तराखंड में गंगा नदी के किनारे बसा एक पवित्र और सुंदर नगर है। यह हरिद्वार से लगभग एक घंटे की दूरी पर स्थित है और आप यहाँ देहरादून से भी आसानी से पहुँच सकते हैं। ऋषिकेश क्यों है खास? ऋषिकेश को “विश्व की योग नगरी ” कहा जाता है। यहाँ एक ओर अध्यात्म और शांति का अनुभव होता है, वहीं दूसरी ओर आप रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग और कैंपिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी ले सकते हैं। ऋषिकेश कैसे पहुँचें? हरिद्वार से दूरी: लगभग 25 किलोमीटर,  हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पास बस स्टैंड है।  वहाँ से ऑटो और टैक्सी सुविधा मिल जायेगा। देहरादून से दूरी: लगभग 45 किलोमीटर निकटतम हवाई अड्डा: जॉलीग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) यहाँ तक आप बस, टैक्सी, ट्रेन या फ्लाइट से आसानी से पहुँच सकते हैं। ऋषिकेश आने का सही समय :- ऋषिकेश घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून तक है। इस दौरान मौसम खुशनुमा होता है और बारिश या भूस्खलन का खतरा नहीं रहता। जुलाई से सितंबर तक का समय मानसून का होता है, इस दौरान यात्रा कर...

💔 रिश्ते: प्रेम, भय और आज की युवा सोच

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हाल ही में  एक राज्य में हुई  घटना और नीली ड्रम का प्रकरण पुरुषों के बीच शादी को लेकर एक गहरा डर और असुरक्षा का भाव उत्पन्न कर रहा है। इसने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि — क्या हम सच में अपनी युवा पीढ़ी को नहीं समझ पा रहे हैं, या समझ कर भी अनदेखा कर रहे हैं? हम आज भी उस पुरानी रुढ़िवादी सोच को अपने दिमाग से निकाल नहीं पाए हैं। सिर्फ समाज में अपनी खोखली छवि बनाए रखने के लिए हम वास्तविकता से आंखें मूंद लेते हैं। अगर हम मानते हैं कि युवा पीढ़ी को प्रेम और रिश्तों की समझ नहीं है, तो क्या यह हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती कि हम उन्हें समझाएँ? "प्रेम त्याग और समर्पण है। यदि तुममें यह भावना है, तो प्रेम करो। यदि नहीं है, तो जिससे प्रेम करते हो, उसी से विवाह  करो।" अब यहाँ एक और बात समझने की है — क्या तुम कानूनी रूप से 18 और 21 वर्ष के हो? क्या तुम्हें सही और गलत की समझ है? क्या तुम जीवन को तार्किक रूप से समझने लगे हो? यदि हाँ, तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 तुम्हें यह मौलिक अधिकार देता है कि तुम अपनी पसंद से शादी कर सको। यदि कोई इसमें बाधा डालता है, तो तुम प्रशासन से अपनी सुरक...

हरिद्वार : देवभूमि उत्तराखंड

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हरिद्वार: हरि का द्वार अर्थात् भगवान का द्वार !   दोस्तों मेरा ये सफर हरिद्वार का था फिर आगे ऋषिकेश का ।  इस कड़ी में आप को हरिद्वार से रूबरू करवाते हैं। आप का कीमती  समय बर्बाद ना करते हुए चलिए सफर की शुरुआत आप के शहर से  करते हैं।       आप जिस भी शहर से आते हो यहाॅ आने के लिए सीधा या अल्टरनेट रुप से रेल की सुविधा है की नहीं ये देख लें। यदि  आप हवाई सफर का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो फिर दिल्ली या  देहरादून आ सकते हैं और फिर वहां से यहां आ सकते हैं। यहां आने  के बाद आपको रहने के लिए कम बजट में आश्रम मिल जायेगा  जिसमें आपको एक कमरा उपलब्ध कराया जाएगा। ज्यादा बजट  में होटल की भी सुविधा है । आप अपने बजट के अनुसार ठहर  सकते हैं। ऑनलाइन गूगल मैप से भी अपने नजदीकी आश्रम और  होटल वालों से संपर्क कर सकते हैं।         यहां आने के बाद आपको यहां के प्रसिद्ध स्थल हर की पौड़ी आना होगा। यहां आने के लिए आपको रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड दोनों  जगह से आटो की सुविधा मिल जायेगा। आप यहां  • गंगा स्नान...

विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली 2024

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  हाल ही में विश्व पुस्तक मेला , 2024 का समापन नई दिल्ली में हो  गया। मुझे सबसे ज्यादा बेहतर यहाँ बनाया गया , बहुभाषी भारत की  भाषा की थीम लगी।  जिसकी तस्वीर आप के साथ साझा कर रहा हूँ। जो इस प्रकार है :-  तस्वीर देखने के लिए धन्यवाद  ! आप यदि कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो आपके सुझाव का हमें इंतजार रहेगा। 

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