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पत्रकारिता: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आजकल विफल क्यों है?

     पत्रकारिता सिर्फ़ समाचार देने का माध्यम नहीं है । बल्कि विचारों और सत्य की आवाज़ है। यह समाज का आईना है, जो शासन की नीतियों, जनता की समस्याओं और सच्चाई के बीच पुल का काम करती है। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बाद इसी का स्थान आता है। इसी कारण पत्रकारिता को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा गया है। पत्रकारिता का इतिहास भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 1780 में ‘हिक्कीज़ बंगाल गजट’ से हुई। यह वह दौर था जब ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को उजागर करने वाला हर लेख एक क्रांति बन जाता था। धीरे-धीरे हिंदी, उर्दू और अन्य भाषाओं में भी अख़बारों की शुरुआत हुई — जिन्होंने जनता को जागरूक किया और स्वतंत्रता संग्राम की नींव मजबूत की। इसी कारण अंग्रेजी सरकार इसे दबाने के लिए कठोर नियम बनाये लेकिन पत्रकारिता जिंदा रही आज के दौर में इसके कई रुप हो गयें है। भारत की आज़ादी में पत्रकारिता और प्रेस का योगदान भारतीय प्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक क्रांति की लहर पैदा की है। बाल गंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ और ‘मराठा’ से “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दि...

राजस्थान SI भर्ती परीक्षा रद्द: क्यों होती है सरकारी परीक्षाओं में धांधली?

हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को धांधली और पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द कर दिया। यह फैसला लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी की थी। तो वही कुछ छात्रों को इसका फ़ायदा भी होगा की परीक्षा दोबारा पारदर्शी तरीके से कराया जायेगा।          पैरवी और लोकसेवा आयोग में साठगांठ से बने छात्रों को बाहर करना बहुत जरूरी था क्योंकि इसके कारण ईमानदार और मेहनती छात्र जो पढ़ के अच्छे नंबर लाए थे। कही न कही वो छात्र मेरिट लिस्ट से बाहर हो गयें थे।  यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। पिछले कुछ सालों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। चाहे वो टीचर भर्ती परीक्षा हो, पुलिस भर्ती हो या SSC और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ—हर जगह से धांधली की खबरें आती रहती हैं। अब सवाल यह है कि परीक्षाओं में बार-बार धांधली क्यों होती है? इसका असर सबसे ज्यादा किस पर पड़ता है? और इसे रोकने के लिए समाधान क्या हो सकते ह...

गुनाहों का देवता : धर्मवीर भारती

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                    गुनाहों का देवता             [ धर्मवीर भारती का अमर प्रेम उपन्यास ]             गुनाहों का देवता हिंदी साहित्य का एक ऐसा उपन्यास है, जिसने दशकों तक पाठकों के दिलों को छुआ है। यह उपन्यास पाठकों को अपने प्रेम का ऐहसास करा देता है। आज भी यह उपन्यास सच्चे प्रेम करने वालों के जिंदगी की कहानी को उजागर कर देता है। इतना ही नहीं ।          धर्मवीर भारती द्वारा रचित यह कृति केवल प्रेम कथा ही नहीं, बल्कि त्याग, समाज की परंपराओं और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं की गहन व्याख्या भी है।   • उपन्यास के मुख्य पात्र - चंदर – संवेदनशील, विद्वान और प्रेम में त्याग करने वाला युवक जो सच्चे प्रेम का मायने ढूढता है।  सुधा – चंचल, मासूम लेकिन परंपराओं से बंधी हुई युवती जो प्रेम में आत्मीय रुप से सदा चंदर की रहती है।  डॉ. शुक्ल – सुधा के पिता और चंदर के गुरु जो राजनीतिक पार्टी से भी जूड़े रहते हैं।  गेशु और बिनती – चंदर के जीवन में अस्थ...

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