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नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

गांधी आश्रम

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  [ गांधी आश्रम, भित्तिहरवा,  पं. चम्पारण , बिहार ]     " पर्यटन आदमी को बुद्धिमान बनाता है। " पर्यटन पर उक्त पंक्तियाँ थॉमस जैफरसन द्वारा युगीन यथार्थ पृष्ठभूमि  में लिखी गई हैं। वर्तमान युग में "गांधी न होते तो आजाद भारत कैसा  होता " ये हमने कभी सोचा नहीं शायद इसलिए गांधी के महत्त्व को  आज की कुछ युवा पीढ़ी भूल रही है। सन् 1916 का वह दिन जब कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में पंडित  राजकुमार शुक्ल ने, किसानों के दयनीय स्थिति से महात्मा गांधी को  रुबरु करायें । तथा बापू को चम्पारण आने का निमंत्रण दिया । तत्पश्चात् 10 अप्रैल 1917 को बापू ने पटना- मुजफ्फरपुर रेलमार्ग  के रास्ते चम्पारण पहुंचे। उस ऐतिहासिक जगह जहाँ बापू ने अपना  'कर्मभूमि' बनाया उसे आज हमलोग 'गांधी आश्रम' के नाम से जानते  हैं। यह गांधी आश्रम बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिला के बेतिया -  नरकटियागंज रास्ते में हैं। यहाँ आप पटना से बेतिया या गोरखपुर  (यूपी) से बेतिया भी आसानी से रेलसेवा था बससेवा द्वारा आ सकते  हैं। यह वहीं जगह है जहाँ गांधी जी सर्वप्रथम किसानों...

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