नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

आखिर सरकार को क्यों नहीं अच्छी लगती छात्र राजनीति ?

अगर सरकार की बात करें तो चाहे आज की सरकार हो या पहले की सरकार हो किसी को छात्र राजनीति अच्छी नहीं लगती है जबकि हकीकत यह है कि अधिकांश दिग्गज नेता छात्र राजनीति से निकल कर आये ।

          देश के तमाम विश्वविद्यालयों मे छात्रों दारा सरकार का विरोध करना , छात्रों पर अंकुश लगाना और राजनीतिक कारनो से छात्रों को  निष्कासित करना कहीं ना कहीं सरकार पर सवाल खड़ा कर रहीं है । छात्र राजनीति ने सदा देश हित मे अपना योगदान दिया है जब - जब सरकार को अंहकार हुआ उसके विरोध मे छात्रों ने आवाज बुलंद किया है चाहे हमारे देश की आजादी की बात हो या छात्र आंदोलन का हो हर समय छात्रों ने अपना अहम योगदान दिया , लेकिन हर समय सरकार ने युवाओं और छात्रों को दबाने का प्रयास किया यदि कोई छात्र सोशल मीडिया मे सरकार के गलत नीतियों के खिलाफ लिखता है तो विश्वविद्यालय द्वारा उसे निष्कासित कर दिया जाता है इसलिए क्योंकि उसने सरकार के विरोध जाकर लिखा है लेकिन एक बात स्पष्ट है ।

 इसमें हमारे देश के कुलपतियों , विश्वविद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों का योगदान है ।  एक समय था जब गुरु अपने शिष्य को ईमानदारी और राष्ट्रहित मे अपना योगदान देने के लिए कहते थे वो आज समय बदल गया है आज वो सरकार के समर्थन मे है बल्कि गुरु को राष्ट्रहित सर्वोपरि रखना चाहिए ना कि पार्टी सर्वोपरि।
      ऐसी बात नहीं है कि विश्वविद्यालय के हर शिक्षक या कुलपति ऐसे है । आज भी अच्छे शिक्षक या कुलपति है तभी तो उनके शिष्य आज भी सरकार के गलत नीतियों का विरोध करते है ।  इसका खामियाजा इन छात्रों के साथ - साथ उनके शिक्षकों को भी भुगतना पड़ता है उन्हें भी कॉलेज से निष्कासित कर दिया जाता है लेकिन सरकार या भष्ट विश्वविद्यालय प्रबंधन यह भूल जाती है की गुरु को शिक्षा या राष्ट्रहित मे अपने शिष्यों को बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालय एकमात्र रास्ता नहीं है । सड़क पर खड़े एक असाधारण बालक को भी अपना शिष्य बनाकर अहंकारी सरकार के खिलाफ खड़ा कर सकते है ।
        छात्रों को भी सोचना चाहिए की छात्र राजनीति छात्रों के हित में और देशहित मे लड़ना चाहिए ना की पार्टियों के हित मे राजनीति करना चाहिए ।


  •     ✍ अमलेश प्रसाद

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