नैनीताल यात्रा

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  नैनीताल यात्रा: नैनीताल में घूमने लायक सभी जगहों की पूरी जानकारी नैनीताल सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह झीलों, मंदिरों, पहाड़ों, व्यू पॉइंट्स और शांति से भरा एक पूरा अनुभव है। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं और चाहते हैं कि कोई भी जगह छूटे नहीं, तो यह ब्लॉग आपके लिए Complete Travel Guide है। 🚆 काठगोदाम: यात्रा की शुरुआत काठगोदाम रेलवे स्टेशन नैनीताल का प्रवेश द्वार है। दिल्ली, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से यहाँ सीधी ट्रेन मिल जाती है।       • समय : दिल्ली से काठगोदाम 7-8 घंटे [ रेल यात्रा ] स्टेशन के बाहर टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं। नोट : 1. ज्यादा सुबह यात्रा करते हैं या रात्रिकालीन में तो इसका ध्यान रखे की चालक मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अनुभवी चालक होना चाहिए ताकि यात्रा में जोखिम का खतरा कम रहे । कोशिश करें की यात्रा दिन में करें।  2. उल्टी करने वालें व्यक्ति यात्रा शुरू करने से पहले उल्टी नहीं होने वाली दवाई आधा घंटा पहले खाकर । बिना डरें यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।  🛕 1. कैंची धाम (Neem Karoli Baba Mandir) काठगोदाम से निकलते ही रास...

कहीं ऐसा तो नहीं पहले के सरकार जैसा आज की सरकार भी किसानों को उलझाय रखना चाहती हैं ।

     आज हम दुनिया को टेक्नॉलोजी के मामले मे टक्कर दे रहे है । हमारी सरकार बुलेट ट्रेन या मिसाइल हो चाहे फाइटर प्लेन हो हम दूसरे देश से आगे आने के लिए बहुत प्रयत्न कर रहे है । बहुत अच्छी बात है कि हमारी नीति सफल हो रहीं है और विश्व पटल पर हमारी छवी सबसे बेहतर बन के उभरी हैं ।
      लेकिन किसानों की स्थिति को अच्छा करने के लिए  अमेरिका , यूरोप या इजरायल की वह टेक्नॉलोजी या नीति भारत क्यों नहीं आ रही है जो हमारे देश के किसानों के लिए कारगर हो । हम सिर्फ बुलेट ट्रेन का ही नकल क्यों कर रहे है ? वहाँ के किसानों के लिए बनी नीतियों पर हम गौर क्यों नही करते है ? यदि सरकार को पता है तो फिर हम अमल कब करेंगे ? कहीं ऐसा तो नहीं किसानों के स्थिति को बेहतर करने के रेस मे और देश के मुकाबले हम अपने आप को पीछे धकेल रहे और रेस मे हिस्सा नहीं ले रहे है । हमे इस सोच को बदलना होगा और हर क्षेत्र के जैसा इसमें भी बदलाव लाना होगा क्योंकि हमारे देश के किसानों की स्थिति आज जैसी है वैसी बहुत पहले नहीं थी कहीं ना कहीं हम इन मामलों मे पीछे होते जा रहे है ।
      जहाँ अन्य देश के किसानों की स्थिति बेहतर है वहीं हमारे देश के किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है ।हमारी बनाई नीति फेल हो जाती है । कर्जमाफी की बात हो या फसल बीमा की बात हो या कहें तो शब्सीडी और लोन की कोई  कारगर नहीं है यदि नीति अच्छी रहती तो हमारे देश के किसानों की स्थिति इतनी खराब नहीं होती ।
  सरकार को सोचनी होगी की आखिर कहाँ कमी है इसका एनालेसिस करना होगा और जहाँ कमी है उसको दूर करना होगा आखिर अब नहीं करेंगे तो कब करेंगे । कहीं ऐसा तो नहीं पहले के सरकार जैसी ऐ भी लम्बे समय तक उलझाय रखना चाहते है तो फिर पहले की सरकार और इस सरकार मे क्या अंतर रह जाएगी ?

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